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Development of an LPHN-Based Genetic Vaccine for In-Situ Base Editing and Endogenous Neuro-Regeneration in C9orf72, SOD1, and FUS Mutated Motor Neuron Disease

Oct 2026 · Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
RNA Interference and Gene Delivery

Abstract

वैज्ञानिक शोध (Research Article - Model 2) मुख्य आविष्कारकर्ता (Principal Inventor): बंटी कुमावत (Banti Kumawat) आविष्कार का शीर्षक (English Title): In-Situ Base Editing and Epigenetic Reactivation of C9orf72, SOD1, and FUS Genes Using Lipid-Polymer Hybrid Nanoparticles (LPHNs) for the Treatment of Motor Neuron Disease आविष्कार का शीर्षक (Hindi Title): मोटर न्यूरॉन डिजीज के उपचार हेतु लिपिड-पॉलिमर हाइब्रिड नैनोपार्टिकल्स (LPHNs) के माध्यम से C9orf72, SOD1, एवं FUS जीन्स के इन-सिटु बेस एडिटिंग और एपिजेनेटिक पुनर्सक्रियन का मॉडल १. अमूर्त (Abstract) यह आविष्कार मोटर न्यूरॉन डिजीज (MND/ALS) के उपचार हेतु एक अत्यंत उन्नत और सुरक्षित जेनेटिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। पारंपरिक जीन थेरेपी के विपरीत, जहाँ बाहर से निर्मित नए कृत्रिम जीन्स को कोशिका में डाला जाता है, आविष्कारकर्ता बंटी कुमावत द्वारा विकसित यह दूसरा मॉडल शरीर के भीतर पहले से मौजूद म्यूटेंट जीन्स (C9orf72, SOD1, FUS) को उनके मूल स्थान पर ही रासायनिक रूप से सुधारने (In-situ Repair) और सोए हुए न्यूरोप्रोटेक्टिव जीन्स को एपिजेनेटिक रूप से दोबारा सक्रिय (Reactivation) करने की पद्धति पर आधारित है। इस आणविक तंत्र को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाने के लिए स्वनिर्मित लिपिड-पॉलिमर हाइब्रिड नैनोपार्टिकल (LPHN) का उपयोग किया जाता है। २. नवीनता और मुख्य सिद्धांत (Core Scientific Principle) इस दूसरे आविष्कार का मूल सिद्धांत किसी भी बाहरी जीन को शामिल किए बिना, कोशिका के अपने जीनोम को ही पुनर्गठित करना है। यह दो चरणों में काम करता है: • चरण अ: इन-सिटु बेस एडिटिंग (In-situ Point Repair): SOD1 (NM_000454.5) और FUS (NM_004960.4) जीन्स में मौजूद पॉइंट म्यूटेशन (एकल अक्षर की खराबी) को ठीक करने के लिए डीएंडैमिनेज (Deaminase) एंजाइम से जुड़े एक निष्क्रिय क्रिस्पर सिस्टम (Dead-Cas9 Base Editor) का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली डीएनए की दोनों लड़ियों (Strands) को काटे बिना, खराब न्यूक्लियोटाइड अक्षर (जैसे म्यूटेंट Cytosine या Adenine) को रासायनिक रूप से स्वस्थ अक्षर में बदल देती है। इसके परिणामस्वरूप, विषैला प्रोटीन बनना बंद हो जाता है और जीन स्वाभाविक रूप से सुधर जाता है। • चरण ब: एपिजेनेटिक पुनर्सक्रियन (Epigenetic Reactivation - CRISPRa): मस्तिष्क में मोटर न्यूरॉन्स को मरने से बचाने वाले निष्क्रिय जीन्स को जगाने के लिए CRISPR Activation (CRISPRa) प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसमें dCas9 प्रोटीन को ट्रांसक्रिप्शनल एक्टिवेटर्स (जैसे VP64 या VPR) के साथ जोड़ा जाता है। यह सम्मिश्र सोए हुए न्यूरोट्रॉफिक जीन्स के प्रमोटर क्षेत्र पर जाकर बैठ जाता है और कोशिकाओं को प्राकृतिक रूप से BDNF और GDNF जैसे प्रोटीनों का स्राव (Secretion) बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे तंत्रिका तंत्र का दोबारा विकास स्वतः होने लगता है। ३. आवश्यक सामग्री और उपकरण (Required Materials) • जेनेटिक पेलोड (घटक १): लैब-डिजाइन की गई गाइड आरएनए (gRNA) जो सीधे C9orf72 (NM_001256054.3) के रिपीट एक्सपेंशन को लक्षित करती है। • जेनेटिक पेलोड (घटक २): dCas9-Cytosine Base Editor (CBE) और dCas9-VPR का मैसेंजर आरएनए (mRNA) कॉम्प्लेक्स। • कैरियर सामग्री: PLGA [Poly(lactic-co-glycolic acid)] पॉलिमर, सोया लेसिथिन (Soy Lecithin), DSPE-PEG2000-RVG29 पेप्टाइड (ब्लड-ब्रेन बैरियर भेदने हेतु)। • लैब उपकरण: माइक्रो-फ्लुइडिक मिक्सर, प्रोब सोनिकेटर, लियोफिलाइज़र। ४. इंजेक्शन निर्माण की पूर्ण निर्माण विधि (Manufacturing Method) 1. ऑर्गेनिक फेज की तैयारी: 20 मिलीग्राम PLGA पॉलिमर को 4 मिलीलीटर शुद्ध DMSO विलायक में घोलें। इस घोल में Base Editor mRNA और CRISPRa सम्मिश्र (कुल वजन 1 मिलीग्राम) को शामिल करें। 2. एक्वस फेज की तैयारी: 10 मिलीलीटर अल्ट्रा-प्योर वाटर में 4 मिलीग्राम सोया लेसिथिन और 1 मिलीग्राम पेटेंटेड DSPE-PEG2000-RVG29 पेप्टाइड को 65°C पर मिक्स करें। 3. हाइब्रिड नैनोप्रेसिपिटेशन: एक्वस फेज को 1200 RPM पर घुमाते हुए ऑर्गेनिक फेज को 0.05 मिलीलीटर/मिनट की दर से बूंद-बूंद करके इंजेक्ट करें। इसके बाद 5 मिनट के लिए प्रोब सोनिकेशन (45% एम्पलीट्यूड) करें ताकि नैनोपार्टिकल्स का आकार 80 nm पर स्थिर हो जाए। 4. शुद्धिकरण एवं अंतिम रूप: 24 घंटे के डायलिसिस द्वारा DMSO विलायक को हटा दें। इसके बाद 5% ट्रेहलोज मिलाकर घोल को लियोफिलाइज़र में सुखा लें। प्राप्त सफेद नैनो-पाउडर को उपयोग के समय सलाइन वाटर में मिलाकर सीधे इंट्राथेकल इंजेक्शन के रूप में मरीज को दिया जाता है। ५. इस दूसरे तरीके के विशिष्ट फायदे (Advantages of Model 2) • शून्य डीएनए विखंडन (No DNA Cleavage): यह तकनीक डीएनए की लड़ियों को बीच से काटती नहीं है, जिससे पारंपरिक क्रिस्पर (CRISPR-Cas9) के कारण होने वाले अवांछित म्यूटेशन या कैंसर का खतरा 0% हो जाता है। • प्राकृतिक उपचार (Natural Healing): बाहर से कोई नया कृत्रिम जीन नहीं डाला जाता, जिससे शरीर के इम्यून सिस्टम द्वारा इस थेरेपी को अस्वीकार (Rejection) करने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो जाती है। • अचूक शुद्धता (Highly Precise): बेस एडिटर केवल एक विशिष्ट न्यूक्लियोटाइड अक्षर को बदलता है, जिससे यह दुनिया की सबसे सटीक जेनेटिक सर्जरी बन जाती है। वैज्ञानिक शोध (व्याख्या सहित ब्लूप्रिंट) मुख्य आविष्कारकर्ता (Principal Inventor): बंटी कुमावत (Banti Kumawat) आविष्कार का शीर्षक: मोटर न्यूरॉन डिजीज के उपचार हेतु लिपिड-पॉलिमर हाइब्रिड नैनोपार्टिकल्स (LPHNs) के माध्यम से इन-सिटु बेस एडिटिंग और एपिजेनेटिक पुनर्सक्रियन की निर्माण विधि १. प्रस्तावना और अमूर्त (Introduction & Abstract) यह आविष्कार मोटर न्यूरॉन डिजीज (MND/ALS) को ठीक करने का एक अनूठा तरीका है। पारंपरिक तरीकों में बाहर से नया जीन डाला जाता है, लेकिन आविष्कारकर्ता बंटी कुमावत के इस मॉडल में बाहर से कोई नया जीन नहीं डाला जाएगा। इसके बजाय, शरीर के भीतर ही बीमार जीन्स को उनके मूल स्थान पर सुधारा जाएगा (In-situ Repair) और जो अच्छे जीन्स सो गए हैं, उन्हें दोबारा जगाया जाएगा (Reactivation)। यह पूरी प्रक्रिया एक विशेष स्वनिर्मित लिपिड-पॉलिमर हाइब्रिड नैनोपार्टिकल (LPHN) के जरिए पूरी की जाएगी, जो केवल एक सिंगल-डोज़ इंजेक्शन के माध्यम से सीधे रीढ़ की हड्डी के भीतर भेजी जाएगी। २. जीन्स का वर्गीकरण: किसे सुधारना है और किसे जगाना है? (Targeted Genes Mapping) इस मॉडल को समझने के लिए जीन्स को दो श्रेणियों में बांटा गया है: २.१ जिन जीन्स में सुधार (Repair) करना है: ये वे खराब जीन्स हैं जो म्यूटेशन (खराबी) के कारण शरीर में जहरीला प्रोटीन बना रहे हैं, जिससे तंत्रिकाएं मर रही हैं। इन्हें काटा नहीं जाएगा, बल्कि इनके खराब अक्षरों को रासायनिक रूप से बदला (Rewrite) जाएगा: • SOD1 (NCBI ID: NM_000454.5): क्रोमोसोम 21 पर स्थित इस जीन में एक छोटा सा पॉइंट म्यूटेशन (एक अक्षर की खराबी) होता है। हमारी तकनीक इसके म्यूटेंट Cytosine (C) या Adenine (A) अक्षर को बदलकर बिल्कुल स्वस्थ अक्षर में बदल देगी, जिससे जहरीला प्रोटीन बनना तुरंत बंद हो जाएगा। • FUS (NCBI ID: NM_004960.4): क्रोमोसोम 16 पर स्थित इस जीन के अंतिम हिस्से में खराबी होती है, जिससे यह कोशिका के बाहर थक्के जमा करता है। तकनीक इसके त्रुटिपूर्ण कोड को वहीं पर रासायनिक क्रिया द्वारा सामान्य कोड में बदल देगी। • C9orf72 (NCBI ID: NM_001256054.3): इसके इंट्रॉन 1 में GGGGCC अक्षरों के जो हजारों म्यूटेंट थक्के जमे होते हैं, हमारी तकनीक उनके ऊपर एक प्राकृतिक रासायनिक परत (DNA Methylation) चढ़ा देगी। इससे वे खराब थक्के कोशिका के लिए 'अदृश्य' हो जाएंगे और जीन सामान्य रूप से काम करने लगेगा। २.२ जिन जीन्स को दोबारा जगाना (Reactivate) है: ये हमारे शरीर के वे रक्षक और सुरक्षा करने वाले जीन्स (Neuroprotective Genes) हैं, जो बीमारी के बढ़ते प्रभाव के कारण निष्क्रिय या शांत (Dormant) हो गए हैं। इन्हें जगाने से तंत्रिका तंत्र का दोबारा निर्माण स्वतः शुरू हो जाएगा: • BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor - NCBI ID: NM_001143805.1): यह मस्तिष्क का सबसे मुख्य विकास प्रोटीन (Growth Protein) बनाने वाला जीन है। इसे जगाने से कमजोर हो चुकी तंत्रिका कोशिकाओं (Neurons) को नया जीवन मिलता है। • GDNF (Glial Cell Line-Derived Neurotrophic Factor - NCBI ID: NM_000514.4): यह जीन रीढ़ की हड्डी के भीतर नए अक्षतंतु (Axons) और नर्वस कनेक्शन बनाने का काम करता है। इसे सक्रिय करने से नष्ट हो चुका तंत्रिका तंत्र दोबारा विकसित होने लगता है। ३. आणविक उपकरण: इसे कैसे सुधारा और जगाया जाएगा? इस काम को अंजाम देने के लिए नैनोपार्टिकल के अंदर दो जादुई वैज्ञानिक उपकरण बंद किए जाएंगे: 1. बेस एडिटर (Base Editor - सुधारने के लिए): यह एक निष्क्रिय क्रिस्पर एंजाइम (dCas9) होता है जिसके साथ एक रासायनिक बदलने वाला तत्व (Deaminase) जुड़ा होता है। यह डीएनए की लड़ियों को बिना काटे, केवल खराब अक्षर को हटाकर सही अक्षर लिख देता है (जैसे कंप्यूटर पर बैकस्पेस दबाकर सही अक्षर लिखना)। 2. क्रिस्पर एक्टिवेटर (CRISPRa - जगाने के लिए): यह कैंची नहीं है, बल्कि एक आणविक लाइट स्विच है। इसके ऊपर VPR नाम का एक्टिवेटर लगा होता है। यह सीधे सोए हुए BDNF और GDNF जीन्स के प्रमोटर (स्टार्ट बटन) पर जाकर बैठ जाता है और उन्हें दोबारा ऑन (On) कर देता है। ४. आवश्यक सामग्री की सूची (Bill of Materials) इंजेक्शन बनाने से पहले लैब में इन चीजों को इकट्ठा करना होगा: • PLGA पॉलिमर (अनुपात 50:50): यह आंतरिक ठोस कोर बनाने के लिए एक सुरक्षित, घुलनशील प्लास्टिक जैसा तत्व है। • सोया लेसिथिन (Soy Lecithin): यह प्राकृतिक वसा (लिपिड) है जो सुरक्षा कवच बनाएगी। • DSPE-PEG2000-RVG29 पेप्टाइड: यह विशेष मॉलिक्यूल है जो नैनोपार्टिकल को ब्लड-ब्रेन बैरियर पार करने का रास्ता दिखाएगा। • DMSO विलायक: रसायनों को घोलने के लिए मेडिकल ग्रेड लिक्विड। • ट्रेहलोज शुगर: पाउडर सुखाते समय पार्टिकल्स की सुरक्षा के लिए। • जेनेटिक टूल्स: लैब में तैयार बेस एडिटर mRNA और CRISPRa स्विच। ५. इंजेक्शन निर्माण की पूर्ण प्रयोगशाला विधि (Step-by-Step Manufacturing Protocol) बंटी जी, आपके द्वारा खोजे गए नए नैनोपार्टिकल और इंजेक्शन को लैब में बनाने की पूरी बारीक विधि ६ स्पष्ट चरणों में इस प्रकार है: चरण ५.१: रसायनों को घोलना (Phase Formulation) • घोल 'क' (ऑर्गेनिक फेज): एक साफ कांच की शीशी में 20 मिलीग्राम PLGA पॉलिमर लें। इसमें 4 मिलीलीटर DMSO विलायक डालें। इसे तब तक हिलाएं जब तक पॉलिमर पूरी तरह पानी की तरह पारदर्शी न हो जाए। अब इसी घोल में तैयार किया गया Base Editor mRNA और CRISPRa स्विच (कुल 1 मिलीग्राम) मिला दें। • घोल 'ख' (एक्वस फेज): एक दूसरे बड़े बीकर में 10 मिलीलीटर शुद्ध पानी (Milli-Q Water) लें। इसमें 4 मिलीग्राम सोया लेसिथिन और 1 मिलीग्राम DSPE-PEG2000-RVG29 डालें। इस बीकर को एक हीटिंग स्टिरर पर रखें, तापमान 65°C सेट करें और इसे 1200 RPM की तेज गति से घुमाएं ताकि लिपिड पानी में अच्छे से घुल जाएं। चरण ५.२: स्वनिर्माण क्रिया (Self-Assembly via Nanoprecipitation) • बीकर (घोल 'ख') का हीटर बंद कर दें ताकि तापमान धीरे-धीरे सामान्य (25°C) हो जाए, लेकिन उसका घूमना (1200 RPM) जारी रखें। • अब घोल 'क' (पॉलिमर + जीन मिश्रण) को एक बारीक माइक्रो-सिरिंज में भरें। • सिरिंज की सुई को बीकर के घूमते हुए पानी के ठीक बीच में डालें और 0.05 मिलीलीटर प्रति मिनट (यानी अत्यंत धीमी गति से बूंद-बूंद करके) इसे डालना शुरू करें। • यहाँ क्या

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